कोरबा: निगम में घुरुवा राज…चेंबर में तय होती है भ्रष्टाचार की स्क्रिप्ट…विष्णु के सुशासन की गठरी… भाजपायी ठेकेदारों को गेटआउट.
कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार जहां पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात कर रही है, वहीं कोरबा नगर पालिका निगम में नियम-कानून को ताक में रखकर अपने चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के आरोपों ने सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामला बालको क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 39 में कूलिंग टावर से डेंगू नाला तक बनने वाले करोड़ों रुपए के आरसीसी नाला निर्माण कार्य से जुड़ा है।
करीब 5 करोड़ 51 लाख रुपए की लागत वाले इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य के लिए नगर निगम द्वारा टेंडर जारी किया गया था। लेकिन अब यह पूरा मामला विवादों और सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल पांच ठेकेदारों में से दो को नियमों की अनदेखी करते हुए गलत तरीके से डिसक्वालिफाई कर दिया गया, जबकि 16 प्रतिशत कम दर वाले ठेकेदार को आनन-फानन में कार्य आवंटित कर दिया गया ।
इतना ही नहीं, जिस ठेकेदार को काम दिया गया है, उसके दस्तावेजों और मापदंडों में भी कई त्रुटियां होने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद उसके इशारे पर नगर निगम चलता है ऐसी बाते सामने आ रही हैं ।
“अफसर-ठेकेदार पार्टनरशिप” की चर्चा गर्म
नगर निगम के गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि, अधिकारी चहेते ठेकेदार के साथ मिलकर ग़लत प्राक्कलन तैयार कर रहे हैं और अधिक मूल्यांकन कर भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है सब कुछ घुरुवा के चेंबर में तय होने की बात सामने आ रही है ।
जनता पूछ रही — क्या कोरबा में “विशेष छूट” है?
पूरा मामला अब सिर्फ एक टेंडर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या कोरबा नगर निगम को भ्रष्टाचार और मनमानी के लिए विशेष छूट मिली हुई है? या अधिकारी विष्णु के सुशासन की गठरी खुले आम भाजपायी ठेकेदारों को नीचा दिखाकर बाँधने में लगे हुए हैं । क्रमशः
